विश्व हिन्दू परिषद ने किया युवा संत चिंतन संगोष्ठी का आयोजन

दीपक मिश्रा

हरिद्वार, 14 जून। विश्व हिंदू परिषद के तत्वाधान में भूपतवाला स्थित स्वतःप्रकाश आश्रम में युवा संत चिंतन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में देश भर से आए युवा संतो ने भागीदारी की। विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने युवा संत चिंतन संगोष्ठी की प्रस्तावना युवा संत धर्माचार्यों के समक्ष प्रस्तुत की और संगोष्ठी का संचालन विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं केंद्रीय मंत्री धर्माचार्य संपर्क अशोक तिवारी ने किया।

संगोष्ठी में राष्ट्र निर्माण में युवा संतो की भूमिका पर गहन चिंतन के साथ विचार मंथन किया गया। संगोष्ठी के संयोजक देवी संपत मण्डल के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद सरस्वती मैनपुरी ने उपस्थित युवा संतो से राष्ट्र, धर्म, समाज के प्रति संतो के कर्तव्य और दायित्व के संबंध में अपने विचार चिंतन को सबके समक्ष रखने का आह्वान किया।

अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती महाराज ने वर्तमान समय में हिन्दू धर्म पर हो रहे हमलो, दुष्चक्रो पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि वर्तमान समय की आवश्यकता है कि प्रत्येक संत एक ग्राम को गोद लेकर राष्ट्र, धर्म, संस्कार और संस्कृति के उत्थान के लिए कार्य करें। महामंडलेश्वर आत्मानंदपुरी महाराज ने कहा कि संतो का दायित्व शासन के प्रति उच्च है। संत को धर्म और समाज के प्रति शासक के कर्तव्य निर्वहन पर समय-समय अपनी बात रखने का अधिकार प्राप्त है।

महामंडलेश्वर स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश महाराज उदासीन ने कहा कि हिन्दुत्व की रक्षा और उसके संवर्धन के लिए युवा संतो को ही महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। विपरीत परिस्थितियों में युवा संतो को समाज का मार्गदर्शन करने को तैयार रहना होगा। महामंडलेश्वर ज्योतिर्मयनंद गिरी महाराज ने हिन्दू समाज के आमजनमानस को हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए सदैव तैयार रहने का आह्वान किया। महामंडलेश्वर रामेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने हिन्दू समाज में सौहार्दपूर्ण वातावरण के लिए सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन से आदर्श परिवार का निमार्ण, संस्कार शालाएं जैसे कार्यों की आवश्यकता पर बल दिया।

श्री वैष्णव व्रत महामंडल के अध्यक्ष श्रीमहंत विष्णुदास महाराज ने बाल संस्कार शालाओ में बच्चों को संस्कारित करने का सुझाव दिया। जिससे आने वाली युवा पीढी, धर्मशील और सहनशील बन सके।

संगोष्ठी में देवी संपत मण्डल के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद सरस्वती, अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती महाराज, महामंडलेश्वर आत्मानंद पुरी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी शिवप्रेमानंद पुरी महाराज, महामंडलेश्वर रामेश्वरानंद सरस्वती महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी दयानंद महाराज, सोहम पीठाधीश्वर स्वामी सत्यानंद महाराज, श्री वैष्णव व्रत महामंडल के अध्यक्ष श्रीमहंत विष्णुदास महाराज, महामंडलेश्वर ज्योर्तिमयनंद गिरि महाराज, महामंडलेश्वर अभयानंद सरस्वती महाराज, महामंडलेश्वर चिदंबरानन्द सरस्वती महाराज, संत जगजीत सिंह शास्त्री, महन्त योगेश्वरानंद सरस्वती, स्वामी अनंतानंद पंजाब, स्वामी देवव्रत ब्रह्मचारी मेघालय, स्वामी हितेश्वरनाथ वृंदावन, गरीबदासी संप्रदाय के श्री महन्त रविदेव शास्त्री, घीसापंथ संप्रदाय के महामंडलेश्वर कृष्णानंद, दादूपंथ के श्रीमहंत विद्यानंद, कबीरपंथ के महंत प्रकाशानंद, जूना अखाड़े के कारोबारी महंत हंसानंद सरस्वती, रामेश्वर ब्रह्मचारी सहित अनेक धर्माचार्य एवं विश्व हिन्दू परिषद के संरक्षक दिनेश चंद्र, केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे, केंद्रीय उपाध्यक्ष जीवेश्वर मिश्र, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं केंद्रीय मंत्री धर्माचार्य संपर्क अशोक तिवारी, प्रांत संगठन मंत्री उत्तराखण्ड अजय कुमार प्रमुख रुप से उपस्थित रहें। संगोष्ठी के आयोजन में अनुज वालिया प्रांत संयोजक बजरंगदल उत्तराखण्ड, बलराम कपूर विभाग अध्यक्ष हरिद्वार, नितिन गौतम जिला अध्यक्ष हरिद्वार, मयंक चैहान धर्माचार्य संपर्क प्रमुख हरिद्वार की प्रमुख भूमिकाएं रही।

Leave a Reply

Your email address will not be published.