दीपक मिश्रा
13 अक्टूबर 2026
*राम वन गमन और भरत मिलाप की लीला ने भावुक किए श्रद्धालु, दशरथ मरण के मंचन पर छलके आंसू*
*103वें वार्षिक रामलीला उत्सव में राम-कैकेयी संवाद से लेकर राम वन गमन तक का हुआ भावपूर्ण मंचन*
*श्री रामलीला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित 103वें वार्षिक रामलीला उत्सव के अंतर्गत सोमवार को राम राज्य घोषणा, मंथरा-कैकेयी संवाद, राम-कैकेयी संवाद, राम वन गमन, लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया।* कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय और प्रभावशाली संवादों के माध्यम से भगवान श्रीराम के वनवास, राजा दशरथ के पुत्र वियोग मार्मिक चित्रण किया। इन प्रसंगों ने रामलीला देखने पहुंचे श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
मंथरा के बहकावे में आकर कैकेयी द्वारा राजा दशरथ से दो वरदान मांगने और भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मिलने के प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया। वहीं, वन गमन के दृश्य ने उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं।
संस्था के अध्यक्ष वीरेंद्र चड्ढा ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए वन गमन किया जिससे श्री राम के आदर्श जीवन मूल्य जन-जन तक पहुंच जाये। भगवान श्रीराम का जीवन हमें मर्यादा, कर्तव्यपालन और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। रामलीला के प्रत्येक प्रसंग में समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश छिपा है।
रामलीला संपत्ति कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष सुनील भसीन ने कहा कि रामायण के प्रसंग हमें परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का बोध कराते हैं। राम वन गमन और भरत मिलाप की लीला त्याग, भाईचारे और पारिवारिक प्रेम का अनुपम उदाहरण है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है।
ट्रस्ट के मंत्री विनय सिंघल एवं प्रवक्ता डॉ संदीप कपूर ने कहा कि रामलीला हमारी प्राचीन परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है। भगवान श्रीराम का आदर्श जीवन प्रत्येक व्यक्ति को सत्य, धर्म और मर्यादा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। रामलीला कमेटी का प्रयास है कि यह परंपरा निरंतर आगे बढ़ती रहे और अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ें।
दादा गुरु भगवत शर्मा एवं महामंत्री महाराज किशन सेठ ने कहा कि राम वन गमन और भरत मिलाप जैसे प्रसंग त्याग, प्रेम, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा की सीख देते हैं। भगवान श्रीराम और भरत का चरित्र हमें सिखाता है कि रिश्तों की वास्तविक मजबूती स्वार्थ में नहीं, बल्कि त्याग और समर्पण में होती है। रामलीला के माध्यम से इन आदर्शों को समाज तक पहुंचाना सराहनीय प्रयास है।
इस अवसर पर ,ऋषभ मल्होत्रा, रविकांत अग्रवाल, अंजना चड्ढा, कन्हैया खेवड़िया, पवन शर्मा, राहुल वशिष्ठ, विशाल गोस्वामी, विकास सेठ, महेश गौड़, सुरेंद्र अरोड़ा, अनिल सखूजा, गोपाल छिब्बर, वीरेंद्र गोस्वामी, मनोज बेदी, सुनील वधावन, दिग्दर्शक, मनोज सहगल सहित बड़ी संख्या में कमेटी पदाधिकारी, सदस्य और रामलीला प्रेमी उपस्थित रहे।