वर्तमान पीढ़ी राम के आदर्शों को मूल रूप में करें आत्मसात-प्रोफेसर शास्त्री – prabhatsahara.com

वर्तमान पीढ़ी राम के आदर्शों को मूल रूप में करें आत्मसात-प्रोफेसर शास्त्री

दीपक मिश्रा

26 अक्टूबर 2026

वैदिक ज्ञान का प्रयोगात्मक स्वरूप राम है। अपनी मां एवं जन्मभूमि स्वर्ग से भी पवित्र है। राम के जीवन में मर्यादा के स्वरूप एक आदर्श पुत्र, पति, राजा, पिता, शासक तथा चरित्र के रूप में सभी कालों में प्रासंगिक एवं महत्वपूर्ण है। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय, हरिद्वार में वाल्मीकि जयंती के अवसर पर माता लाल देवी यज्ञशाला में आयोजित यज्ञ एवं विशिष्ट व्याख्यान के अवसर पर उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं वेद विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर दिनेशचन्द्र शास्त्री ने अपने उद्बोधन में वाल्मीकि रामायण के रहस्यों को उद्घाटित करते हुए प्रस्तुत किए। ज्ञात हो कि गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय, हरिद्वार में वाल्मीकि जयंती के अवसर पर वाल्मीकिकृत रामायण तथा वर्तमान समय में राम को लेकर प्रचलित भ्रांतियों को वैदिक तथ्यों के आधार पर स्पष्ट करते हुए प्रोफेसर शास्त्री ने कहा कि राम के जन्म से पूर्व भी दशहरा तथा दीपावली महोत्सव का आयोजन होता रहा है लेकिन कालान्तर में प्रकाशित हुए ग्रन्थों से उत्पन्न भ्रांतियों के चलते राम को कपोलकल्पित व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत करके वाल्मीकि रामायण के मूल स्वरूप के साथ छेडछाड कर अपनी व्यक्तिगत विचारधारा को प्रस्तुत किया। उन्होंने वाल्मीकि रामायण के आधार पर शम्भुकवध, वैदेही (सीता वनवास), दशानन एवं महाराज दशरथ के जीवन को भी तार्किक तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत किया। प्रो0 शास्त्री ने दशानन की व्याख्या दसों दिशाओं में शासनकर्ता के रूप में तथा दशरथ की व्याख्या दसों दिशाओं में रथ भ्रमण से की है। वैदिक साहित्य, मनुस्मृति, तुलसीकृत रामायण, महाभारत आदि महाग्रन्थों के आधार पर उन्होंने राम के चित्र को आजादबाहु, बड़ी-बड़ी आंखें, स्वरूप में सरलता, जिसमें एक पल में राजा और दूसरे पल में वनवास तथा महाहनु (बड़ी ठोडी वाले) जैसे गुणों के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी को राम के चरित्र को मूल रूप में आत्मसात करते हुए अनुसरण करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे कुलसचिव प्रो0 सत्यदेव निगमालंकार ने वाल्मीकि जयंती के अवसर पर सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कृष्ण, राम तथा वाल्मीकि का जीवन आचरणीय है। कार्य के प्रति ईमानदारी एवं निष्ठा तथा समाज के लिए त्याग राम के जीवन के प्रमुख आदर्श हैं। उन्होंने कहा कि यह वर्ष संस्थापक कुलपिता स्वामी श्रद्धानन्द के बलिदान के शताब्दी वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर विभिन्न प्रेरणाप्रद्ध कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर में सम्पन्न होंगे। यह कार्यक्रम वर्ष भर संचालित किए जायेंगे। उन्होंने कर्मचारियों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराए जाने वाले कार्यक्रमों की घोषणा की। आयोजित यज्ञ में मुख्य यज्ञमान के रूप में सोनु चौधरी को पगड़ी तथा अंगवस्त्र प्रदान का सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर प्रो0 एल0पी0 पुरोहित, प्रो0 पंकज मदान, प्रो0 नवनीत, प्रो0 सुरेखा राणा, प्रो0 मुकेश कुमार, प्रो0 अंजली गोयल, उपकुलसचिव डा0 श्वेतांक आर्य, डा0 अजेन्द्र, डा0 चिरंजीव बेनर्जी, डा0 विनित विश्नोई, डा0 विपुल भट्ट, डा0 भारत वेदालंकार, प्रो0 अरूण कुमार, प्रो0 मनोज कुमार, डा0 रोशन लाल, डा0 अंकित कुमार, डा0 पंकज कौशिक, जनसम्पर्क अधिकारी डा0 शिव कुमार चौहान, डा0 मदन लाल जाट, नारायण नेगी, डा0 अजय मलिक, सत्यदेव, कुलभूषण शर्मा, डा0 संदीप कुमार, राजकुमार, डा0 सत्यपति, डा0 विवेक, सुनील भगत, डा0 भगवानदास जोशी, अंकित कृष्णात्री सहित विभिन्न संकायों के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी एवं छात्र उपस्थित रहे। यज्ञ में ब्रह्मत्व एवं यज्ञ का संचालन डा0 दीनदयाल द्वारा किया गया।

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