(दशरथ मरण और भारत मिलाप के मंचन ने दर्शकों को किया भावुक,) श्री राम के जीवन के प्रसंग हमें देते हैं धर्म मार्ग न छोड़ने की प्रेरणा-डॉक्टर कपूर – prabhatsahara.com

(दशरथ मरण और भारत मिलाप के मंचन ने दर्शकों को किया भावुक,) श्री राम के जीवन के प्रसंग हमें देते हैं धर्म मार्ग न छोड़ने की प्रेरणा-डॉक्टर कपूर

दीपक मिश्रा

14 अक्टूबर 2026

*नौका लीला, दशरथ मरण और भरत मिलाप के भावपूर्ण मंचन ने दर्शकों को किया भावुक*

*103वें रामलीला उत्सव में प्रभु श्रीराम के वनवास और भरत मिलाप के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर*

हरिद्वार। श्री रामलीला कमेटी (रजि.) हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित 103वें वार्षिक रामलीला उत्सव के अंतर्गत मंगलवार को नौका लीला, दशरथ मरण और भरत मिलाप की लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने प्रभावशाली अभिनय, सशक्त संवाद और जीवंत प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रभु श्रीराम के वनवास, पुत्र वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने और भरत-राम के मिलन के मार्मिक प्रसंगों ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं। रामलीला स्थल जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा।

श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष वीरेंद्र चड्ढा ने कहा कि रामलीला मर्यादा, त्याग और भाईचारे का संदेश देती है। नौका लीला, दशरथ मरण और भरत मिलाप के प्रसंग हमें कर्तव्यनिष्ठा, त्याग, प्रेम और पारिवारिक मर्यादाओं का संदेश देते हैं। भगवान श्रीराम का जीवन प्रत्येक व्यक्ति को सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

 

श्री रामलीला संपत्ति कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष सुनील भसीन ने कहा कि रामलीला की प्रत्येक लीला अपने भीतर गहरा संदेश समेटे हुए है। राजा दशरथ का पुत्र वियोग, भरत का भाई के प्रति समर्पण और प्रभु श्रीराम की मर्यादा आज भी समाज के लिए अनुकरणीय हैं। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।

श्री रामलीला संपत्ति कमेटी ट्रस्ट के मंत्री विनय सिंघल ने कहा कि भरत मिलाप का प्रसंग त्याग, प्रेम और निस्वार्थ समर्पण की अद्भुत मिसाल है। भरत ने राजसत्ता से अधिक महत्व अपने भाई श्रीराम के प्रति प्रेम और सम्मान को दिया। यह प्रसंग सिखाता है कि रिश्तों की मजबूती पद और प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और त्याग से कायम रहती है।

प्रवक्ता डॉ. संदीप कपूर ने कहा कि श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंग हमें विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, मर्यादा और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ने की प्रेरणा देते हैं। दशरथ मरण का प्रसंग पुत्र प्रेम की गहराई को दर्शाता है, जबकि भरत मिलाप भाईचारे और पारिवारिक एकता का अनुपम उदाहरण है। रामलीला जैसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखते हैं और समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं।

बड़ी संख्या में रामलीला प्रेमी रहे मौजूद

इस अवसर पर कमेटी के महामंत्री महाराज कृष्ण सेठ, दादा गुरु भगवत शर्मा, रविकांत अग्रवाल, अंजना चड्ढा, कन्हैया खेवड़िया, ऋषभ मल्होत्रा, पवन शर्मा, राहुल वशिष्ठ, विशाल गोस्वामी, विकास सेठ, महेश गौड़, सुरेंद्र अरोड़ा, अनिल सखूजा, गोपाल छिब्बर, वीरेंद्र गोस्वामी, मनोज बेदी, सुनील वधावन और दिग्दर्शक मनोज सहगल सहित बड़ी संख्या में कमेटी पदाधिकारी, सदस्य तथा रामलीला प्रेमी उपस्थित रहे।

 

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