दीपक मिश्रा
25 अक्टूबर 2026
समाजवादी पार्टी के उत्तराखण्ड प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल मतीन सिद्दीक़ी ने प्रेस को जारी एक बयान में कहा कि भाजपा के नेताओं को यह समझना चाहिए कि अखिलेश जी का बयान समझने के लिए थोड़ी समझदारी और संविधान की बुनियादी समझ होनी चाहिए, जो व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की शाखाओं में नहीं मिलती! हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी पहले भी ऐसा बयान दे चुके हैं और सभी लोग भली भांति जानते हैं कि किस के लिए और किस परिपेक्ष में यह बयान दिया गया है।लेकिन फिर भी 9 सेकंड की क्लिप काटकर हाय-हाय कर रहे भाजपाइयों की नफरती राजनीति की हवा निकाल दी है। उनका सीधा सा व्यंग्य था कि चुनाव आते ही भाजपा जिस तरह अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए देश के गरीब नागरिकों और मजदूरों को ‘घुसपैठिया’ कहकर बांटने लगती है, और s i r के नाम पर करोड़ों मतदाताओं को घुसपैठिया बता कर उनके वोट काटने का काम कर रही है।और जब इतनी भारी संख्या में देश में घुसपेटिये हैं तो सरकार उनके ख़िलाफ़ क्या कार्यवाही कर रही है।और अगर अपने ही देश में एक जगह से दूसरी जगह जाना भाजपा की डिक्शनरी में घुसपैठ है, तो फिर लखनऊ के मुख्यमंत्री आवास में बैठे पौड़ी गढ़वाल के अजय सिंह बिष्ट जी को भाजपा किस परिभाषा में रखेगी? अब भाजपाई रोना रो रहे हैं कि योगी जी तो 1998 में यूपी-उत्तराखंड के बंटवारे से पहले सांसद बने थे।यही तो अखिलेश जी का व्यंग्य है! जब बाबा साहेब आम्बेडकर के संविधान के तहत पूरा देश एक है और उत्तराखंड का बेटा यूपी जाकर पांच बार सांसद और दो बार मुख्यमंत्री बन सकता है, तो फिर चुनाव आते ही देश के आम नागरिकों को ‘घुसपैठिया’ और बाहरी कहने का ठेका भाजपा को किसने दिया? क्या संविधान का अनुच्छेद 19 केवल भाजपा नेताओं की सुविधा के लिए बना है? अखिलेश जी ने उत्तराखंड का नहीं, बल्कि भाजपा के नफरती शब्दकोश का पोस्टमार्टम किया है और चुनौती दी है कि पहले घुसपैठिए की परिभाषा तय करो! भाजपा वाले हमें देवभूमि के सम्मान का पाठ न पढ़ाएं,क्यों कि उत्तराखण्ड के सबसे बड़े हितैषी समाजवादी पार्टी एव उनके नेतागण हैं।उत्तराखण्ड बनाने का श्रेय सर्व प्रथम माननीय मुलायम सिंह यादव जी को जाता है जिन्होंने उo प्रo के दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजने के साथ साथ कौशिक समिति बनाकर पूरे प्रदेश की रिपोर्ट तैयार कराई।और जहाँ तक राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी का सवाल है उनका उत्तराखण्ड का लगाव भी जग ज़ाहिर है।जिस समय केदार नाथ धाम में आपदा आई थी तो उस समय सबसे पहले माननीय अखिलेश यादव जी ने ही 380 करोड़ की आर्थिक मदद के साथ साथ तमाम सामग्री से भी मदद की थी।इसी के साथ ही टर्नल में फंसे मज़दूरों के लिए भी सबसे पहले उन्होंने ही आवाज़ उठाई थी और उन लोगों की आर्थिक मदद भी की थी।अंकिता भंडारी कांड में सांसद डिम्पल यादव जी ने सबसे पहले संसद में यह मुद्दा उठाया और परिवार से मिलकर हर सम्भव मदद का आश्वासन भी दिया।
श्री सिद्दीकी ने कहा कि माननीय अखिलेश यादव जी का उत्तराखण्ड से हृदय से एव भावनात्मक जुड़ाव है।क्यों कि उन्हें यदि गंगा नहान करना हो या परिवार के सदस्यों की अस्थि विसर्जन या कोई अन्य धार्मिक कार्यक्रम हो तो माननीय अखिलेश यादव जी सदेव उत्तराखण्ड हरिद्वार को ही चुनते हैं।
मैनपुरी से हमारी सांसद श्रीमती डिंपल यादव जी स्वयं उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल की बेटी हैं और हमारे परिवार में देवभूमि का मान बसता है। अखिलेश जी ने उसी वीडियो में साफ कहा है कि भाजपा ने जनता की ‘आस्था और श्रद्धा’ के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ किया है—और यह शत-प्रतिशत सच है! दिल्ली में केदारनाथ का फर्जी ट्रस्ट बनाने वाले, अनियंत्रित टनलिंग करके पवित्र जोशीमठ को धंसाने वाले, अंकिता भंडारी के हत्यारे ‘वीआईपी’ को बचाने वाले और UKSSSC के पेपर लीक कराकर पहाड़ के नौजवानों पर लाठियां भांजने वाले लोगों को किसने संरक्षण दिया? उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती से लेकर आरओ/एआरओ तक 60 से अधिक पेपर लीक कराकर दो करोड़ युवाओं का भविष्य बर्बाद करने वाली डबल-इंजन सरकार आज अपनी नाकामी छिपाने के लिए नफरती शब्दावली पर उतर आई है, जबकि देश जानता है कि विकास क्या होता है।उo प्रo में मात्र 22 महीने में बना देश का सबसे बेहतरीन आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, रिकॉर्ड समय में दौड़ी लखनऊ मेट्रो, 15 लाख छात्रों को बंटे लैपटॉप और 1090 वूमेन पावर लाइन आज भी सुशासन का पैमाना हैं। भाजपा की नफरत की राजनीति अब एक्सपोज हो चुकी है, देवभूमि की जनता इनके पाखंड को समझ चुकी है और 2027 में समाजवादी विकास की राजनीति ही इस जनविरोधी शासन का अंत करेगी।