(भैरव घाट पर पितृ अमावस्या पर ब्रह्मलीन संतों का तर्पण) यह अमावस्या पितरों का स्मरण ही नहीं बल्कि कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व-हरि गिरि महाराज – prabhatsahara.com

(भैरव घाट पर पितृ अमावस्या पर ब्रह्मलीन संतों का तर्पण) यह अमावस्या पितरों का स्मरण ही नहीं बल्कि कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व-हरि गिरि महाराज

दीपक मिश्रा

10 अक्टूबर 2026

हरिद्वार के भैरव घाट पर सर्वपितृ अमावस्या पर ब्रह्मलीन संतों का दिव्य तर्पण, प्रदेश की सुख-समृद्धि और विकास के लिए विशेष प्रार्थना।

सनातन धर्म की महान गुरु-शिष्य परंपरा के अनुरूप सर्वपितृ अमावस्या के पावन अवसर पर आज श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा द्वारा हरिद्वार में माँ गंगा के पवित्र तट भैरव घाट पर ब्रह्मलीन संतों, गुरु मूर्तियों एवं सिद्ध महात्माओं का विधि-विधान से तर्पण एवं पूजन कार्यक्रम भव्य रूप से संपन्न हुआ।

यह दिव्य अनुष्ठान श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री परम पूज्य श्रीमहंत हरि गिरि महाराज* के निर्देशानुसार एवं अध्यक्षता में आयोजित किया गया।

*पितृ अमावस्या का महत्व बताते हुए श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा* कि सर्वपितृ अमावस्या केवल पितरों का स्मरण नहीं, बल्कि हमारी संन्यास परंपरा के उन ब्रह्मलीन महापुरुषों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन तप, त्याग, साधना, धर्मरक्षा और राष्ट्रसेवा में समर्पित किया। गुरु मूर्तियों का स्मरण करना ही सनातन की आत्मा है।

कार्यक्रम में सिद्धपीठ श्री दूधेश्वरनाथ मठ के पीठाधीश्वर एवं जूना अखाड़ा के वरिष्ठ सभापति श्री महंत प्रेम गिरि महाराज, अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता *श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज* ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड भारत की आध्यात्मिक आत्मा है। यहाँ का विकास पूरे राष्ट्र की समृद्धि से जुड़ा है। आज हमने माँ गंगा से प्रदेश में सुख-शांति, सुरक्षा और सिक्स लेन सड़कों सहित आधुनिक विकास की प्रार्थना की है।

*हिमालय पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर वीरेंद्र आनंद गिरि महाराज* ने अपने संबोधन में कहा कि गंगा तट पर किया गया यह तर्पण सनातन संस्कृति के संरक्षण का प्रतीक है। गुरु परंपरा के आशीर्वाद से ही धर्म और मानवता का कल्याण संभव है।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से *श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज, श्रीमहंत महेश पुरी महाराज, श्रीमहंत कंचन गिरि महाराज, श्रीमहंत शिवम सरस्वती महाराज, श्रीमहंत शैलेंद्र गिरि महाराज, पुजारी भास्कर पुरी, पुजारी दिवाकर पुरी, श्री दीपक गिरि महाराज* सहित जूना अखाड़ा के थानापति, संत-महंत बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

सभी संतों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ माँ गंगा के जल से जलांजलि, पुष्पांजलि और तर्पण कर ब्रह्मलीन गुरु मूर्तियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

*उत्तराखंड के विकास के लिए विशेष प्रार्थना*

संत समाज ने भगवान बदरीविशाल, बाबा केदारनाथ, माँ गंगा, यमुना, धारी देवी, नंदा देवी सहित उत्तराखंड के समस्त देवी-देवताओं से प्रदेश में सिक्स लेन राष्ट्रीय राजमार्गों, चारधाम यात्रा मार्गों के सुदृढ़ीकरण, सुरक्षित पर्वतीय मार्गों, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और रोजगार के व्यापक विस्तार की मंगलकामना की।

अंत में माँ गंगा की आरती कर उत्तराखंड, भारतवर्ष और विश्व कल्याण की प्रार्थना की गई।

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